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अतीत के पन्नो से होकर
वर्तमान से आहत
भविष्य से डरता हुआ
एक सवाल जहेन में उठा है
मुझे हिंदू नही क्रिश्चन नही
मुस्लिम नही ज्यू नही
शिख नही ईसाई नही
बौद्ध नही जैन नही
बस एक इनसान बनकर जीना है
क्या मेरे लिए कोई जगह है ??
मुझे काला नही गोरा नही
क्षुद्र नही ब्राह्मण नही
वैश्य नही क्षत्रिय नही
सिया नही सुन्नी नही
उचा नही और नीचा भी नही
बस एक इनसान बनकर जीना है
क्या मेरे लिए कोई जगह है ??
ना जाने क्यों लगता है
सवाल ये सबके मन मे छुपा है
बस एकबार झाककर देखो
इस सवाल के लिए
क्या आपके मन मे भी कोई जगह है ??
अतीत के पन्नो से होकर
वर्तमान से आहत
भविष्य से डरता हुआ
जो सवाल जहेन में उठा है
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वर्तमान से आहत
भविष्य से डरता हुआ
एक सवाल जहेन में उठा है
मुझे हिंदू नही क्रिश्चन नही
मुस्लिम नही ज्यू नही
शिख नही ईसाई नही
बौद्ध नही जैन नही
बस एक इनसान बनकर जीना है
क्या मेरे लिए कोई जगह है ??
मुझे काला नही गोरा नही
क्षुद्र नही ब्राह्मण नही
वैश्य नही क्षत्रिय नही
सिया नही सुन्नी नही
उचा नही और नीचा भी नही
बस एक इनसान बनकर जीना है
क्या मेरे लिए कोई जगह है ??
ना जाने क्यों लगता है
सवाल ये सबके मन मे छुपा है
बस एकबार झाककर देखो
इस सवाल के लिए
क्या आपके मन मे भी कोई जगह है ??
अतीत के पन्नो से होकर
वर्तमान से आहत
भविष्य से डरता हुआ
जो सवाल जहेन में उठा है
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