ना वो आँधी ना ये तुफ़ा
ना वो ज्वार ना ही ये सूखा
हमे कभी रुला सके
अब तुम भी ना ऐसी कोशिश करना
ऐ जमाने वालो
क्यों की जब भी हम रोते है
कुछ तो बदल ज़रूर देते है
ना ये जख्म ना वो घाव
नाही वो मन मे उठता तनाव
हमे कभी तड़पा सके
अब तुम भी ना हमे तड़पाना
ऐ जमाने वालो
क्यों की जब भी हम तड़पते है
कुछ तो बदल ज़रूर देते है
कभी शांति तो कभी विनाश
कभी गाँधी तो कभी सुभाष
हम किसकी राह चुनेंगे
ये परखने की भूल ना करना
क्यों की जब भी, जैसे भी हम लढते है
कुछ तो बदल ज़रूर देते है
ना वो फलक ना ये धरा
और नाही ये सागर सारा
तुम्हे भागने के लिए काफ़ी होगा
अब हमे ना सरफ़रोश बना देना
क्यों की जब भी हम सरफ़रोश बनते है
तो बहोत कुछ बदल ज़रूर देते है
ना वो ज्वार ना ही ये सूखा
हमे कभी रुला सके
अब तुम भी ना ऐसी कोशिश करना
ऐ जमाने वालो
क्यों की जब भी हम रोते है
कुछ तो बदल ज़रूर देते है
ना ये जख्म ना वो घाव
नाही वो मन मे उठता तनाव
हमे कभी तड़पा सके
अब तुम भी ना हमे तड़पाना
ऐ जमाने वालो
क्यों की जब भी हम तड़पते है
कुछ तो बदल ज़रूर देते है
कभी शांति तो कभी विनाश
कभी गाँधी तो कभी सुभाष
हम किसकी राह चुनेंगे
ये परखने की भूल ना करना
क्यों की जब भी, जैसे भी हम लढते है
कुछ तो बदल ज़रूर देते है
ना वो फलक ना ये धरा
और नाही ये सागर सारा
तुम्हे भागने के लिए काफ़ी होगा
अब हमे ना सरफ़रोश बना देना
क्यों की जब भी हम सरफ़रोश बनते है
तो बहोत कुछ बदल ज़रूर देते है

