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Saturday, July 2, 2011

जिंदगी की कशमकश में

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जिंदगी की कशमकश में 
उलझकर इतना रहे गए
तुमने दिलपर दी दस्तक मगर
हम दिल लगाना भुल गए

कभी गहरे ख्वाबो में
तो कभी ऊँचे इरादों में
कभी ठगती परछाइयों में
तो कभी थकाती जिम्मेदारियों में
हम व्यस्त इतना रहे गए
मिलना था कभी तुमसे मगर
हम फुरसत निकालना भुल गए

कभी उन शर्मोहयाओने
तो कभी सिसकती आहों ने
कभी अनजान फासलों ने
तो कभी कमजोर इरादों ने
हमें इस कदर बांधे रखा
तुमने मिलाई जो नजर हमसे
तेरी आँखों में देखना भुल गए

अब हमें ना कोई हैरत होगी
गर हमसे तुम्हे शिकायत है
हमें ना कोई गैरत होगी
गर तुमसे ना मोहब्बत करने की इजाजत है
हम तो जुर्म ही ऐसा कर बैठे
तुमने तो की हर कोशिश मगर
तुम्हे समझना हम भुल गए

जिंदगी की कशमकाश में
उलझकर इतना रहे गए
तुमने दिलपर दी दस्तक मगर
हम दिल लगाना भुल गए

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